25 जुलाई से सावन, जानें कैसे मनायें भोलेबाबा को
Post By : CN Rashtriya Webdesk   |  Posted On: 2 months ago  |  245

25 जुलाई से सावन, जानें कैसे मनायें भोलेबाबा को

आषाढ़ का महीना खत्म होने वाला है आैर सावन का महीना आने वाला है। नये साल के शुरूआत से ही सावन महीने का इंतजार िशव भक्तों को रहता है। बाबा भोलेनाथ की विशेष कृपा पाने के लिए भक्त सावन महीने में विशेष िवधि से पूजा अर्चना करते है। कर्इ िशव मंदिरों मे तो कांवड़िया भक्तों की कतार बाबा के शिवलिंग पर जल चढ़ाने की लगी रहती है। एेसा कहा जाता है कि विवाह संबंधी बाधा को दूर करने के लिए िशव पार्वती की िवशेष पूजा व सोमवार का व्रत किया जाता है जो जल्द से जल्द विवाह करवाता है। 

सावन के महीने की शुरुआत 

24 जुलाई को आषाढ़ का महीना समाप्त हो जाएगा। इसके बाद 25 जुलाई, रविवार के दिन सावन का महीना शुरू हो जाएगा। इस दिन सावन के महीने की प्रतिपदा तिथि है। 26 जुलाई को सावन का पहला सोमवार पड़ेगा। 

सावन महीने के सोमवार 

सोमवार का बाबा भोलेनाथ का माना जाता है इसलिए सावन के सोमवार के दिन का महत्व आैर बढ़ जाता है। इस बार सावन के चार सोमवार व्रत पड़ रहे हैं। सोमवार का पहला व्रत 26 जुलाई को है जबकि इसका आखिरी सोमवार 16 अगस्त को है। सावन के हर सोमवार में बेल पत्र से भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा की जाती है।

सावन व्रत और शिव पूजा की विधि

सूर्योदय से पहले जागें और स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को स्वच्छ कर वेदी स्थापित करें। शिवलिंग पर दूध चढ़ाकर महादेव के व्रत का संकल्प लें।  सुबह-शाम भगवान शिव की प्रार्थना करें। पूजा के लिए तिल के तेल का दीया जलाए और भगवान शिव को पुष्प अर्पण करें। मंत्रोच्चार करने के बाद शिव को सुपारी, पंच अमृत, नारियल और बेल की पत्तियां चढ़ाएं। व्रत के दौरान सावन व्रत कथा का पाठ जरूर करें।

सावन महीने का महत्व 

श्रावन में भगवान शिव की पूजा और उनका अभिषेक करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। सोमवार की पूजा हरे, लाल, सफेद, केसरिया, पीला या आसमानी रंग का वस्त्र पहन कर करनी चाहिए

रुद्राभिषेक में प्रयोग की जाने वाली सामग्री

शिवलिंग के अभिषेक से पहले इन चीजों को एकबार देख लें कि यह सभी चीजें हैं या नहीं। अभिषेक के लिए गाय का घी, चंदन, पान का पत्ता, धूप, फूल, गंध, बेलपत्र, कपूर, मिठाई, फल, शहद, दही, ताजा दूध, मेवा, गुलाबजल, पंचामृत, गन्ने का रस, नारियल का पानी, चंदन पानी, गंगाजल, पानी, सुपारी और नारियल आदि की सही तरीके से व्यवस्थाय कर लें। अगर आप अन्य सुंगधित पदार्थ शिवलिंग पर अर्पित करना चाहते हैं तो वह भी लेकर पूजा से पहले ही रख लें। इसके साथ ही श्रृंगी (गाय के सींग से बना अभिषेक का पात्र) श्रृंगी पीतल या फिर अन्य धातु की भी बाजार में उपलब्ध होता है। रुद्राष्टाध्यायी के एकादशिनि रुद्री के ग्यारह आवृति पाठ किया जाता है। इसे ही लघु रुद्र कहा जाता है। शिवलिंग से बहने वाले पानी को इकट्ठा करने की व्यवस्था करें और फिर वेदी पर रखें।

पहले इन देवी-देवताओं को करें आमंत्रित

घर पर रुद्राभिषेक करने के लिए सबसे पहले मिट्टी का शिवलिंग बनाएं। अगर घर पर पारद शिवलिंग पहले से है तो यह और भी अच्छा है। इस पूजा की शुरुआत से पहले भगवान गणेश की आराधना की जाती है, फिर माता पार्वती, नौ ग्रह, माता लक्ष्मी, पृथ्वी माता, ब्रह्मदेव, अग्निदेव, सूर्यदेव और गंगा माता को पूजा आमंत्रित किया जाता है और उनके लिए आसान या सीटें तैयार की जाती हैं। इन सभी देवी-देवताओं की रोली-अक्षत और फूल चढ़ाकर पूजा करके प्रशाद अर्पण करने के बाद शिवलिंग की पूजा की जाती है।

महाशिवरात्रि के मौके पर घर पर इस तरह करें रुद्राभिषेक

घर पर शिवलिंग को उत्तर दिशा में रखें और भक्त का मुख पूर्व की तरफ होना चाहिए। अभिषेक के लिए श्रृंगी में सबसे पहले गंगाजल डालें और अभिषेक शुरू करें फिर उसी से गन्ने का रस, शहद, दही, दूध अर्थात पंचामृत समेत जितने भी तरल पदार्थ हैं, उनसे शिवलिंग का अभिषेक करें। ध्यान रखें कि भगवान शिव का अभिषेक करते समय महामृत्युंजय मंत्र, शिव तांडव स्तोत्र, ओम नम: शिवाय या फिर रुद्रामंत्र का जप करते रहें। इसके बाद शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं और फिर पान का पत्ता, बेलपत्र, सुपारी आदि सभी चीजें शिवजी को अर्पित करें। इसके बाद भगवान शिव के भोग के लिए जो व्यंजन बनाकर रखें हैं, उनको भी शिवलिंग पर अर्पित कर दें। इसके बाद भगवान शिव के मंत्र का 108 बार जप करें और फिर पूरे परिवार के साथ शिवलिंग की आरती उतारें। अभिषेक के जल को एकत्रित करके पूरे घर में छिड़काव करें और फिर सभी को पीने के लिए दे दें। मान्यता है कि ऐसा करने से सभी रोग दूर हो जाते हैं। महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक की पूरी प्रकिया में शिव मंत्रों का जप करते रहें।

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