20 जुलाई को देवशयनी एकादशी, जानें क्या करें
Post By : CN Rashtriya Webdesk   |  Posted On: 2 weeks ago  |  190

20 जुलाई को देवशयनी एकादशी, जानें क्या करें

कल 20 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ देव सो जाएंगे और फिर 14 नवंबर से देवोत्थान एकादशी के दिन जागेंगे। आपको बता दें कि कल से देवशयनी एकादशी के दिन से ही चर्तुमास का आरंभ हो रहा है। यह चार महीना योगियों के लिए शुभ माना गया है। इस दौरान शुभ कार्य करना वर्जित होता है। इन चार महीनों में भगवान विष्णु सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव को दे देते हैं और खुद निद्रा के लिए चले जाते हैं। इसके चार महीने बाद देवोत्थान एकादशी 14 नवंबर कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष को भगवान विष्णु शयन निद्रा से उठते हैं। भगवान विष्णु की निद्रा टूटने के बाद ही मांगलिक कार्यक्रमों की शुरुआत होती है। अब चार महीने बाद ही सभी प्रकार के मांगलिक कार्यक्रम शुरू होंगे। देवशयनी एकादशी का व्रत मंगलकारी होता है। इस व्रत के करने से याचक के सभी पापों का नाश हो जाता है। देवशयनी एकादशी को हरिशयनी भी कहते हैं। 

इन शुभ मुहूर्तों में करें पूजा- अर्चना

ब्रह्म मुहूर्त- 04:14 ए एम से 04:55 ए एम

अभिजित मुहूर्त- 12:00 पी एम से 12:55 पी एम

विजय मुहूर्त- 02:45 पी एम से 03:39 पी एम

गोधूलि मुहूर्त- 07:05 पी एम से 07:29 पी एम

अमृत काल- 10:58 ए एम से 12:27 पी एम

कथा

सतयुग में मांधाता नामक एक चक्रवर्ती राजा राज्य करते थे। मांधाता के राज्य में प्रजा बहुत सुखी थी। एक बार उनके राज्य में तीन साल तक वर्षा नहीं होने की वजह से भयंकर अकाल पड़ा गया था। अकाल से चारों ओर त्रासदी का माहौल बन गया था। इस वजह से यज्ञ, हवन, पिंडदान, कथा-व्रत आदि कार्य में कम होने लगे थे। प्रजा ने अपने राजा के पास जाकर अपने दर्द के बारे में बताया।

राजा इस अकाल से चिंतित थे। उन्हें लगता था कि उनसे आखिर ऐसा कौन सा पाप हो गया, जिसकी सजा इतने कठोर रुप में मिल रहा था। इस संकट से मुक्ति पाने के उद्देश्य से राजा सेना को लेकर जंगल की ओर चल दिए। जंगल में विचरण करते हुए एक दिन वे ब्रह्माजी के पुत्र अंगिरा ऋषि के आश्रम पहुंचे गए। ऋषिवर ने राजा का कुशलक्षेम और जंगल में आने कारण पूछा।

राजा ने हाथ जोड़कर कहा कि मैं पूरी निष्ठा से धर्म का पालन करता हूं, फिर भी में राज्य की ऐसी हालत क्यों है? कृपया इसका समाधान करें। राजा की बात सुनकर महर्षि अंगिरा ने कहा कि यह सतयुग है। इस युग में छोटे से पाप का भी बड़ा भयंकर दंड मिलता है। महर्षि अंगिरा ने राजा मांधाता को बताया कि आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करें। इस व्रत के फल स्वरूप अवश्य ही वर्षा होगी।

महर्षि अंगिरा के निर्देश के बाद राजा अपने राज्य की राजधानी लौट आए। उन्होंने चारों वर्णों सहित पद्मा एकादशी का विधिपूर्वक व्रत किया, जिसके बाद राज्य में मूसलधार वर्षा हुई। ब्रह्म वैवर्त पुराण में देवशयनी एकादशी के विशेष महत्व का वर्णन किया गया है। देवशयनी एकादशी के व्रत से व्यक्ति की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

देवशयनी एकादशी व्रत विधि

एकादशी तिथि 19 जुलाई, सोमवार को रात 09:59 बजे से शुरू हो रही है। 20 जुलाई को शाम 07:17 बजे तक रहेगी। उदया तिथि होने के कारण 20 जुलाई को व्रत रखा जाएगा। प्रातः स्नान करें। भगवान विष्णु का स्मरण करें। व्रत का संकल्प लें। पीले रंग का आसन बिछाकर उस पर विष्णु जी की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान विष्णु को धूप, दीप, पीले फूल अर्पित करें। पूरे दिन व्रत रहें। भगवान विष्णु का ध्यान करें एवं मन में उनके मंत्रों का जप करें। शाम के समय भगवान विष्णु व मां लक्ष्मी का पूजन करें। प्रसाद चढ़ाएं अगले दिन द्वादशी तिथि पर दान के बाद ही व्रत का पारण करें।

भगवान विष्णु के मंत्र

ॐ विष्णवे नम:

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